कृपया पोस्ट शेयर करें...

गहड़वाल वंश (Gahadavala Dynasty) – गहड़वाल वंश का मूल निवास स्थान विंध्याचल पर्वत का वन क्षेत्र माना जाता है। पहले ये प्रतिहारों के सामंत थे। प्रतिहारों के पतन के बाद कन्नौज पर इस वंश की स्थापना हुयी। इस वंश का संस्थापक चंद्रदेव था। दिल्ली के तोमरों ने भी इनकी अधीनता स्वीकार कर ली।

चंद्रदेव –

चंद्रदेव इस वंश का संस्थापक और इनकी स्वतंत्र सत्ता का जन्मदाता था। इसने महाराजाधिराज की उपाधि धारण की थी। इसने गोपाल को पराजित कर कन्नौज पर अधिकार कर लिया था। इसने कलचुरी नरेश यशकर्ण को पराजित कर गंगा-दोआब क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया था। इसने काशी, कौशल और इंद्रप्रस्थ को अपने साम्राज्य का अंग बना लिया।

इसके बाद मदनपाल शासक बना जो कि एक दुर्बल शासक था। राहन और बसही अभिलेख इसी से संबंधित हैं। इसके बाद इसका पुत्र गोविंदचंद्र शासक बना।

गोविंदचंद्र (1114-55 ईo)-

यह इस वंश का सर्वाधिक शक्तिशाली शासक था। एक बार तुर्कों ने कन्नौज पर आक्रमण कर इसके पिता मदनपाल का अपहरण कर लिया। तब इसने उनसे संघर्ष किया और अपने पिता को मुक्त कराया। इसने पाल शासकों से मगध जीता और मालवा पर अधिकार किया।इसके लेखों में इसे विविध विद्याविचार वाचस्पति कहा गया है। इसकी पत्नी कुमारदेवी के सारनाथ लेख में इसे विष्णु का अवतार कहा गया है। कुमारदेवी बौद्ध धर्म की अनुयायी थी जिसने सारनाथ में धर्मचक्र जिनबिहार का निर्माण कराया। गोविन्द के मनेर ताम्रलेख में तुरुष्कदंड कर का वर्णन मिलता है। इसका मंत्री लक्ष्मीधर राजनीतिशास्त्र का पंडित था, इसने कृत्यकल्पतरु की रचना की थी। इसी लक्ष्मीधर को मंत्र महिमा का आश्चर्य कहा जाता है।

इसे भी पढ़ें...  कोहिनूर हीरा कहाँ है ? (History of Kohinoor Diamond)

इसके बाद इसका पुत्र विजयचन्द्र शासक बना।

विजयचन्द्र (1155-70 ईo)-

इसी के समय सेन वंश के शासक लक्ष्मण सेन ने आक्रमण किया। परन्तु वह युद्ध में पराजित हुआ। इसी के काल में गहड़वालों की स्थिति कमजोर होना प्रारम्भ हो गयी। दिल्ली का क्षेत्र इनके हाथ से निकलकर चौहानों के पास चला गया।

जयचंद (1170-94 ईo)-

इस वंश का यह अंतिम शक्तिशाली शासक था। इसका साम्राज्य मालवा से चीन तक विस्तृत था। इसका कमौली अभिलेख बनारस से प्राप्त हुआ। इसने तुर्कों और गुजरात के सोलंकियों को कई बार हराया था। अपनी विजय के उपलक्ष्य में इसने राजसूय यज्ञ भी किये। पूर्व में विस्तार के प्रयास में इसे लक्ष्मणसेन से पराजय का मुँह देखना पड़ा। अंत में 1194 ईo में मुहम्मद ग़ौरी और कुतुबुद्दीन ऐबक ने यमुना तट पर स्थित चंदावर (एटा) की लड़ाई में इसे पराजित किया और मार डाला।

Recommended Books

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण पुस्तकें आप यहाँ से खरीद सकते हैं और लोकप्रिय उपन्यासों को यहाँ से खरीदें। धन्यवाद !

सुगम ज्ञान टीम का निवेदन

प्रिय पाठको,
आप सभी को सुगम ज्ञान टीम का प्रयास पसंद आ रहा है। अपने Comments के माध्यम से आप सभी ने इसकी पुष्टि भी की है। इससे हमें बहुत ख़ुशी महसूस हो रही है। हमें आपकी सहायता की आवश्यकता है। हमारा सुगम ज्ञान नाम से YouTube Channel भी है। आप हमारे चैनल पर समसामयिकी (Current Affairs) एवं अन्य विषयों पर वीडियो देख सकते हैं। हमारा आपसे निवेदन है कि आप हमारे चैनल को SUBSCRIBE कर लें। और कृपया, नीचे दिए वीडियो को पूरा अंत तक देखें और लाइक करते हुए शेयर कर दीजिये। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

सुगम ज्ञान से जुड़े रहने के लिए

Add to Home Screen

चर्चा
(अब तक देखा गया कुल 2,448 बार, 2 बार आज देखा गया)
कृपया पोस्ट शेयर करें...