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संसद की प्रमुख समितियाँ – संसद में विभिन्न कार्यों के उद्देश्य से बहुत सी समितियां गठित की जाती हैं। इनमे बहुत सी समितियों का प्रावधान भारतीय संविधान द्वारा किया गया है। इनके अतिरिक्त कुछ संविधानेत्तर समितियों का भी गठन किया जाता है। संसद की कुछ प्रमुख समितियां निम्नलिखित हैं –

प्राक्कलन समिति

इस समिति में सदस्यों की संख्या 30 होती है जो कि लोकसभा से संबंधित होते हैं। इस समिति में राज्यसभा के सदस्यों को शामिल नहीं किया जाता है। इन सदस्यों के कार्यकाल एक वर्ष का होता है। सरकार की अनुदान मांगे इस समिति के प्रतिवेदनों की प्रतीक्षा नहीं करतीं। इस समिति के प्रतिवेदन पर लोकसभा में बहस नहीं होती। यदि सदस्य बनाने के बाद कोई व्यक्ति मंत्री बनता है तो मंत्री पद ग्रहण करने वाली तिथि से उस सदस्य की समिति से सदस्यता समाप्त हो जाएगी।

लोकलेखा समिति

इसे प्राक्कलन समिति की जुडवां बहन कहा जाता है। इस समिति में कुल 22 सदस्य होते हैं, इनमे 15 लोकसभा से, इन सदस्यों का चयन आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है 7 सदस्य राज्यसभा से इस समिति लिए नामनिर्दिष्ट किये जाते हैं। परन्तु राज्यसभा के इन सदस्यों को मत देने का अधिकार नहीं होता। इसे लघु लोकसभा भी कहा जाता है। इस समिति के अध्यक्ष का मनोनयन लोकसभा अध्यक्ष द्वारा विपक्ष के सदस्यों में से किया जाता है। लोकसभा सचिवालय इस समिति का कार्यालय होता है।
1967 में पहली बार मीनू मसानी विरोधी दल के नेता बने साथ ही लोकलेखा समिति के अध्यक्ष भी बने। यह समिति अपना प्रतिवेदन लोकसभा को देती है। कोई मंत्री इस समिति का सदस्य नहीं हो सकता। यदि सदस्य बनाने के बाद कोई व्यक्ति मंत्री बनता है तो मंत्री पद ग्रहण करने वाली तिथि से उस सदस्य की समिति से सदस्यता समाप्त हो जाएगी।

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सरकारी उपक्रमों की समिति

कृष्ण मेनन समिति की संस्तुति के आधार पर 1963 से इस समिति की व्यवस्था की गयी। इस समिति में कुल 22 सदस्य होते हैं, इनमे 15 लोकसभा से इस समिति के लिए निर्वाचित होते हैं और 7 राज्यसभा से नामित। कोई भी मंत्री इस समिति का सदस्य नहीं होता।  का गठन है साल मई के प्रारंभ में किया जाता है। इस समिति का अध्यक्ष लोकसभा द्वारा नामित किया जाता है।

कार्य मंत्रणा समिति

लोकसभा अध्यक्ष इसका पदेन अध्यक्ष होता है। लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति में एक अध्यक्ष और 14 अन्य सदस्य होते हैं। वहीं लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति में राज्यसभा का सभापति इसका पदेन अध्यक्ष होता है।

नियम समिति

इस समिति की भी संरचना कार्य मंत्रणा समिति की तरह ही होती है। लोकसभा की नियम समिति में अध्यक्ष सहित कुल 15 सदस्य होते हैं। लोकसभा अध्यक्ष इस समिति का अध्यक्ष होता है। परंतु राज्यसभा की नियम समिति में सभापति और उपसभापति सहित कुल 16 सदस्य होते हैं। राज्यसभा का सभापति इस समिति का सभापति होता है।

ग्रंथालय समिति

इस समिति में कुल 9 सदस्य होते हैं। इनमें से 6 सदस्य लोकसभाध्यक्ष द्वारा और 3 सदस्य राज्यसभा सभापति द्वारा नामित किये जाते हैं। इस समिति का गठन प्रति वर्ष किया जाता है।

अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के कल्याण संबंधी समिति –

इस समिति में सदस्यों की कुल संख्या 30 होती है। इनमें से 20 सदस्य लोकसभा से और 10 सदस्य राज्यसभा से लिए जाते हैं। इस समिति में भी कोई मंत्री सदस्य नहीं हो सकता।

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