स्वागतम्
कृपया पोस्ट शेयर करें...

भारत की मिट्टियाँ ( Indian Soils ) – विज्ञान की जिस शाखा में मिट्टियों / मृदाओं का अध्ययन किया जाता है। उसे मृदा विज्ञान ( Pedology ) कहा जाता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् ने मिट्टियों को आठ भागों में विभाजित किया है। कुछ प्रमुख प्रकार की मिट्टियों के बारे में जानकारी निम्नलिखित है –

जलोढ़ / दोमट / कछारी मिट्टी ( Alluvial Soil )

भारत में मृदा का सबसे बड़ा वर्ग यही है। यह नदियों द्वारा बहा कर लायी गयी मृदा होती है, यह दो प्रकार की होती है – बांगर व खादर। गंगा के मैदान की पुरानी जलोढ़ मिट्टी को बांगर तथा नई जलोढ़ मिट्टी को खादर कहते हैं। बांगर मिट्टी की पहुँच बाढ़ के जल से परे कुछ ऊँचाई पर होती है। इसमें पोटाश की बहुलता, परन्तु नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व ह्यूमस की कमी होती है। यह मृदा भारत के 40% क्षेत्रफल पर लगभग 15 लाख वर्ग किलोमीटर में विस्तृत है। यह मिट्टी उर्वरता की दृष्टि से काफी अच्छी मानी जाती है। इसमें गेहूँ, धान, मक्का, तिलहन, दलहन, आलू इत्यादि की फसल भी होती है।

काली मिट्टी ( Black Soil )

इसे रेगुर मृदा भी कहा जाता है। इस मिट्टी का निर्माण बेसाल्ट चट्टानों के टूटने फूटने से होता है। इस मिट्टी का काला रंग टिटेनीफेरस मैग्नेटाइट जीवाश्म की उपस्थिति के कारण होता है। इस मिट्टी में आयरन, एल्युमिनियम, मैग्नीशियम व चुना की बहुलता पायी जाती है। परन्तु नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और जैविक पदार्थों की कमी पायी जाती है। इसमें जलधारण क्षमता बहुत अधिक पायी जाती है। इसीलिए इसे सिंचाई की कम आवश्यकता होती है। यह भीगने पर चिपचिपी और सूखने पर इसमें दरारें पड़ जाती हैं। इसलिए इसे स्वतः जुताई वाली मिट्टी भी कहा जाता है। कपास की खेती के लिए यह सर्वाधिक उपयुक्त होती है। इसीलिए इसे कपास की काली मिट्टी भी कहा जाता है। इसमें कपास के अतिरिक्त गेहूं, ज्वार, बाजरा इत्यादि की भी फसल होती है। इस मृदा का सर्वाधिक विस्तार महाराष्ट्र में है।

इसे भी पढ़ें...  विश्व के मरुस्थल (Desserts of the World)

पश्चिमी भारत की काली मिट्टी का निर्माण लावा से हुआ है। इसलिए इसे लावा मिट्टी भी बोल दिया जाता है।

लाल मिट्टी ( Red Soil )

इसका लाल रंग आयरन ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण होता है। परन्तु जलयोजित रूप में यह पीली दिखाई पड़ती है। इसका निर्माण जलवायविक परिवर्तन के फलस्वरूप रवेदार एवं कायांतरित के विघटन व नियोजन से होता है। इस मृदा में आयरन व सिलिका की बहुलता पायी जाती है। परन्तु नाइट्रोजन, फॉस्फोरस व ह्यूमस की कमी होती है। यह मृदा प्रायः उर्वरता विहीन बंजर भूमि के रूप में पायी जाती है। परन्तु चूने का प्रयोग कर इसकी उर्वरता बढ़ाई जा सकती है। इस मृदा में गेहूं, दाल, कपास व मोटे अनाजों की खेती की जाती है।

लैटेराइट मिट्टी ( Laterite Soil )

ये आर्द्र अपक्षालित प्रदेशों की मिट्टी है। इस मिट्टी का निर्माण मानसूनी जलवायु की आर्द्रता एवं शुष्कता के क्रमिक परिवर्तन के परिणामस्वरूप उत्पन्न विशिष्ट परिस्थितियों में होता है। इसमें आयरन व सिलिका की अधिकता होती है। इस मृदा को तीन रूपों में वर्गीकृत किया गया है। गहरी लाल लैटेराइट, सफ़ेद लैटेराइट और भूमिगत जलवायी लैटेराइट। सफ़ेद लैटेराइट के सफ़ेद रंग का कारण केओलिन होता है। भूमिगत जलवायी लैटेराइट की उर्वरता सर्वाधिक और सफ़ेद लैटेराइट की उर्वरता सबसे कम होती है। इस मिट्टी में काजू की अच्छी उपज होती है। इस मिट्टी का प्रधान क्षेत्र मालाबार तटीय प्रदेश है।

  • लैटेराइट मृदा चाय व इलाइची की खेती के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होती है।
इसे भी पढ़ें...  पृथ्वी की आतंरिक संरचना (The Internal Structure of the Earth)

मृदा / मिट्टी से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य –

  • भारतीय मृदाओं में किस सूक्ष्म तत्व की सर्वाधिक कमी पायी जाती है – जस्ता 
  • कौन सी फसल मृदा को नाइट्रोजन से भरपूर कर देती है – मटर 
  • भूमि की उर्वरता बढ़ाने के लिए कौनसी फसल उगाई –  उड़द 
  • हिमालय की मिट्टियों में किसका आभाव रहता है – ह्यूमस
  • पौधों को जल सर्वाधिक किस मिट्टी में मिलता है – चिकनी मिट्टी 
  • किस मिट्टी में जल का आवागमन कम होता है – चिकनी मिट्टी 
  • सामान्य फसलें उगाने के लिए मृदा का pH मान कितना होना चाहिए – 6 से 7 
  • अम्लीय मृदा को कृषि योग्य बनाने के लिए किसका प्रयोग किया जाता है – चूना ( लाइम )
  • मृदा में खारापन और क्षारीयता की समस्या का हल क्या है – जिप्सम ( कैल्शियम सल्फेट )
  • भारत में सर्वाधिक क्षारीय क्षेत्र किस राज्य में पाया जाता है – उत्तर प्रदेश 
  • भारत के किस क्षेत्र में मृदा अपरदन की समस्या गंभीर है – शिवालिक पहाड़ियों के पाद क्षेत्र 
  • मृदा की उर्वरा शक्ति में वृद्धि हेतु क्या आवश्यक है – फसल चक्र 
  • मृदा अपरदन रोकने का सबसे अच्छा उपाय – वनरोपण 

WhatsApp पर सुगम ज्ञान से जुड़ें

चर्चा
(अब तक देखा गया कुल 274 बार, 1 बार आज देखा गया)
कृपया पोस्ट शेयर करें...
Close Menu
Inline
Inline