सिन्धु घाटी सभ्यता / हड़प्पा सभ्यता तथा उससे सम्बंधित तथ्य
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सिन्धु घाटी सभ्यता / हड़प्पा सभ्यता और उससे सम्बन्धित तथ्य – सिन्धु घाटी सभ्यता विश्व की प्राचीनतम नदी घाटी सभ्यताओं में से एक है | इस सभ्यता का विकास सिन्धु तथा घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ इसीलिए इसे सिन्धु घाटी सभ्यता कहते हैं | सन् 1921 ई. में सर जॉन मार्शल के नेतृत्व में रायबहादुर दयाराम साहनी  ने हड़प्पा का उत्खनन किया और सिन्धु घाटी सभ्यता की खोज की | इस प्रकार इस सभ्यता को हड़प्पा सभ्यता भी कहा जाता है | इस सभ्यता से सम्बंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य –

  • इस सभ्यता का काल 2350 से 1750 ई.पू. निर्धारित किया गया है |
  • सिन्धु घाटी सभ्यता / हड़प्पा सभ्यता काँस्ययुगीन सभ्यता थी |
  • यह सभ्यता उत्तर में माण्डा (जम्मू कश्मीर) से लेकर दक्षिण में दायमाबाद (महाराष्ट्र) तथा पूर्व में आलमगीरपुर (मेरठ, उत्तर प्रदेश) से लेकर पश्चिम में सुत्कांगेडोर (अफगानिस्तान) तक फैली हुई है |
  • इसकी आकृति त्रिभुजाकार है।
  • हड़प्पा सभ्यता से सम्बन्धित विभिन्न स्थल : भारत के विभिन्न राज्यों में स्थल – जम्मू कश्मीर में माण्डा, हरियाणा में राखीगढ़ी, बनावली, कुणाल, भिर्दाना, मीताथल, पंजाब में रोपड़, बाड़ा, संघोंल, राजस्थान में कालीबंगा (शाब्दिक अर्थ – काले रंग की चूड़ियाँ), उत्तर प्रदेश में आलमगीरपुर, रावण उर्फ़ बड़ागाँव, अम्बखेड़ी, गुजरात में लोथल, सुरकोटदा, रंगपुर, धौलावीरा, भगतराव, प्रभाषपाटन, महाराष्ट्र में दैमाबाद, अफगानिस्तान में सुत्कांगेडोर, शोर्तुगोयी, मुन्दिगाक, पाकिस्तान में हड़प्पा, मोहेंजोदड़ो (शाब्दिक अर्थ – मृतकों / प्रेतों का टीला) |
  • लोथल से सबसे बड़ी जहाजों की गोदी (डॉक-यार्ड) के साक्ष्य मिले हैं |
  • हड़प्पन लिपि भावचित्रात्मक लिपि है | यह लिपि दायीं से बायीं ओर लिखी जाती है |
  • मोहनजोदड़ो के धान्य कोठार इस सभ्यता की सबसे बड़ी संरचना हैं |
  • भोगवा नदी के तट पर स्थित लोथल में इस सभ्यता का एकमात्र बंदरगाह स्थित था |
  • सिन्धु क्षेत्र को मेहुल कहा गया है |
  • लोथल व रंगपुर से चावल के साक्ष्य मिले हैं |
  • धौलावीरा इस सिन्धु सभ्यता का सबसे विकसित स्थल था |
  • इस सभ्यता के लोगों को लोहे का ज्ञान नहीं था |
सामाजिक जीवन – 
  • समाज का आधार परिवार था, जोकि मातृसत्तात्मक था | उस समय समाज चार वर्गों में बँटा था – विद्वान, योद्धा, व्यापारी और शिल्पकार |
  • इस सभ्यता के लोग शाकाहारी एवं माँसाहारी दोनों थे |
  • जुआ खेलना, शिकार करना, नृत्य-संगीत आदि इस सभ्यता के लोगों के आमोद-प्रमोद के प्रमुख साधन थे |
  • इस सभ्यता के लोगों को कपड़े बनाने का ज्ञान था तथा ये ऊनी एवं सूती दोनों प्रकार के वस्त्र पहनते थे |
  • समाज में शवों को जलाने एवं दफ़नाने की प्रथा प्रचलित थी |
धार्मिक जीवन –
  • सिन्धु सभ्यता के लोग मातृदेवी की पूजा करते थे | इसके साथ ही वृक्ष पूजा का भी प्रचलन था | तथा कूबड़वाला सांड लोगों के लिए विशेष पूजनीय था |
  • नाग की भी पूजा लोग करते थे |
  • इस सभ्यता में मन्दिर के अवशेष नहीं मिले हैं |
आर्थिक जीवन –
  • कृषि, पशुपालन, शिल्प और व्यापार आर्थिक जीवन के प्रमुख आधार थे |
  • हड़प्पा सभ्यता से गेहूँ, जौ, कपास, खजूर, तरबूज, मटर, राई, सरसों एवं तिल सहित कुल नौ फसलों की जानकारी मिली है |
  • विश्व में सर्वप्रथम कपास की खेती यहीं प्रारम्भ हुई, इसीलिए यूनानियों ने इसे सिण्डाॅन कहा है |
  • कुत्ता, बैल, बकरी, भेड़ आदि पालतू पशु थे |
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