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ओपेक ( OPEC ) की स्थापना सितंबर 1960 ईo में बगदाद में की गयी। इसके संस्थापक सदस्य देश ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब तथा वेनेजुएला थे। ऐसा अनुमान लगाया गया है कि विश्व का लगभग 75% पेट्रोल ओपेक राष्ट्रों के पास जमा है। 

उद्देश्य :- इस संगठन का उद्देश्य खनिज तेल के उत्पादन व इसकी कीमत को नियंत्रित करके इन राष्ट्रों के हितों का उन्नयन करना।

इसके अंतर्गत तेल की कीमतों को स्थिरता प्रदान करना, तेल की अधिक कीमत प्राप्त करना तथा समय समय पर इनके हित संवर्धन हेतु नीतियों का निर्धारण करना।

सदस्यता प्राप्ति हेतु अर्हताएं-

इस संगठन की सदस्यता उन देशों के लिए है जो पर्याप्त मात्रा में अशोधित तेल का निर्यात करते हैं तथा जिनके हित इन देशों के हितों से मिलते जुलते हैं। समान हित रखने वाला कोई भी देश इस संगठन का सदस्य बन सकता है। बशर्ते कुल प्रभावी सदस्यों का 3/4 इसका समर्थन करता हो। इन समर्थकों में पाँचों संस्थापक देश भी हों।

बाद में इस संगठन के सदस्य बनने वाले देश – क़तर (1961), लीबिया व इण्डोनेशिया (1962), संयुक्त अरब अमीरात (1967), अल्जीरिया (1969), नाइजीरिया (1971), इक्वाडोर (1973), गैबोन (1975), अंगोला (2007), इक्वेटोरियल गिनी (2017), कांगो (2018) में

वर्तमान (9 दिसंबर 2018) में इस संगठन के 15 सदस्य देश हैं।

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ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब, वेनेजुएला, क़तर, लीबिया, संयुक्त अरब अमीरात, अल्जीरिया, नाइजीरिया, इक्वाडोर, गैबोन, अंगोला, Equatorial Guinea, कांगो 

  • दिसंबर 1992 ईo से अक्टूबर 2007 तक इक्वाडोर ने अपनी सदस्यता निलंबित राखी।
  • 1995 ईo में गैबोन ने सदस्यता छोड़ दी।
  • तेल भण्डारों व निवेश में कमी के कारण इंडोनेशिया ने ओपेक की सदस्यता मई 2008 में छोड़ दी। सदस्यता त्यागने के इंडोनेशिया के इस अनुरोध को सितंबर 2008 में विएना में हुयी बैठक में स्वीकार किया गया। इण्डोनेशिया ने सदस्यता त्यागते हुए मई 2008 में कहा कि अब वह तेल निर्यातक की बजाय आयातक देश हो गया है।

OPEC के शिखर सम्मलेन –

  • इस संगठन का पहला शिखर सम्मलेन 1975 ईo में अल्जीयर्स में हुआ था।
  • दूसरा शिखर सम्मलेन 2000 ईo में कराकस में संपन्न हुआ था।
  • इसका तीसरा शिखर सम्मलेन सऊदी अरब की राजधानी रियाद में 2008 ईo में हुआ। इसकी अध्यक्षता सऊदी अरब के शाह अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज ने की। इसी सम्मलेन में ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद ने डॉलर को कागज का टुकड़ा बताया। चेतावनी दी कि भविष्य में तेल संबंधी सौदे डॉलर के अतिरिक्त किसी अन्य मुद्रा में किये जा सकते हैं।
  • तेल संकट पर विचार के लिए ओपेक की बैठक वियना में 24 अक्टूबर 2008 को संपन्न हुयी। घटते हुए तेल के मूल्यों पर इस बैठक में भारी चिंता जताई गयी।
  • इसका 2018 का शिखर सम्मलेन 20-21 जून को विएना (ऑस्ट्रिया) में संपन्न हुआ।
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