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भारत के राष्ट्रपति राष्ट्र के प्रमुख और भारत के प्रथम नागरिक होते हैं। भारतीय राष्ट्रपति देश का प्रथम नागरिक है। ‘राष्ट्रपति’ भारत गणराज्य के कार्यपालिका के अध्यक्ष होते हैं।  राष्ट्रपति भारत की सशस्त्र सेनाओं (थलसेना, नौसेना एवं वायुसेना) के सर्वोच्च सेनानायक भी होते हैं। भारत के राष्ट्रपति का निवास नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन है जिसे रायसीना हिल के नाम से भी जाना जाता है। वर्तमान में श्री रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति हैं, उन्होंने 25 जुलाई 2017 को पद व गोपनीयता की शपथ ली।

भारत के राष्ट्रपति

भारतीय संविधान में राष्ट्रपति की व्यवस्था –

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 53 (1) के अनुसार संघ की कार्यपालक शक्ति राष्ट्रपति में निहित होगी। इसका प्रयोग वह स्वयं या अपने अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से करेगा। राष्ट्रपति संघीय कार्यपालिका का प्रमुख होता है। साथ ही यह संसद का भी अभिन्न अंग है। लोकसभा, राज्यसभा और राष्ट्रपति मिलकर संयुक्त रूप से संसद का निर्माण करते हैं। अनुच्छेद 74 (1) के अनुसार राष्ट्रपति अपने कृत्यों के लिए मत्रिपरिषद की सलाह पर निर्भर है।

राष्ट्रपति का निर्वाचन –

भारत में राष्ट्रपति का चुनाव आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्यति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के आधार पर होता है। आम चुनाव की भांति इसमें भी गुप्त मतदान की प्रथा को अपनाया गया है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति के निर्वाचन मण्डल में लोकसभा, राज्यसभा एवं राज्य विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य होते हैं। 70वें संविधान संशोधन 1992 के तहत केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली व पांडिचेरी विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों को भी इसमें शामिल किया गया है। राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए कम से कम 50 प्रस्तावक और 50 अनुमोदकों को होना अनिवार्य है। 1997 से पूर्व अनुमोदकों व प्रस्तावकों की निम्नतम संख्या 10-10 थी। राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होता है। भारत की जनता इसमें प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लेती। बल्कि जनता के प्रतिनिधियों द्वारा राष्ट्रपति को चुना जाता है।

राष्ट्रपति का कार्यकाल –

भारत का राष्ट्रपति पद ग्रहण की तिथि से 5 वर्ष के लिए पद धारण करता है।

उसके कार्यकाल की समाप्ति तिथि से पूर्व ही अगले राष्ट्रपति के निर्वाचन की प्रक्रिया पूर्ण कर ली जाती है।

कार्यकाल पूर्ण होने से पूर्व भी राष्ट्रपति को महाभियोग के द्वारा पद से हटाया जा सकता है।

भारत के राष्ट्रपति का त्यागपत्र –

संविधान के अनुच्छेद 56 (1) के अनुसार राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को संबोधित करता है। अनुच्छेद 56 (2) के अनुसार उपराष्ट्रपति इसकी सूचना लोकसभा अध्यक्ष को देता है। इस स्थिति में अगले राष्ट्रपति की नियुक्ति तक अनुच्छेद 65 (1) के अनुसार उपराष्ट्रपति इस पद का कार्य वहन करेगा। यह उपराष्ट्रपति भी उपलब्ध नहीं है तो सर्वोच्च न्यायलय का मुख्य न्यायाधीश कार्यभार संभालेगा। सीजेआई के भी उपलब्ध न होने पर सर्वोच्च न्यायालय का वरिष्ठतम न्यायाधीश (जो भी उपलब्ध हो) कार्यभार संभालेगा। ये सब राष्ट्रपति उत्तराधिकार अधिनियम 1969 के अंतर्गत आता है।

महाभियोग –

संविधान के अनुच्छेद 61 में वर्णित प्रक्रिया के अनुसार राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाया जा सकता है। यह एक अर्द्ध न्यायिक प्रिक्रिया है जो संसद में चलाई जाती है। अनुच्छेद 61 (1) के अनुसार संसद का कोई सदन राष्ट्रपति पर महाभियोग का आरोप लगाएगा। अनुच्छेद 61 (3) के अनुसार दूसरा सदन उस आरोप का अन्वेषण करेगा या कराएगा। इस अन्वेषण में राष्ट्रपति को अपना पक्ष स्वयं या अपने प्रतिनिधि के माध्यम से रखने का अधिकार होगा। यह अनुच्छेद 56 (1) (ख) के अनुसार संविधान का अतिक्रमण करने पर राषट्रपति पर लगाया जाता है। सबसे महत्वपूर्ण सवाल कि क्या महाभियोग की प्रक्रिया के दौरान राष्ट्रपति स्वंय त्यागपत्र दे सकता है ? इसकी उत्तर है ‘हाँ’ वह इस तौरान त्याग पत्र दे सकता है। क्योंकि वैसे भी वह प्रक्रिया उसे पद से हटाने के लिए ही चलाई जा रही होती है।

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राष्ट्रपति का पुनः निर्वाचन –

संविधान के अनुच्छेद 57 में भारत के राष्ट्रपति के पुनः निर्वाचन के बारे में पात्रता निर्धारित की गई है।

इसके अनुसार राष्ट्रपति का पद ग्रहण करने वाला व्यक्ति दोबारा राष्ट्रति बन सकता है।

राष्ट्रपति के चुनाव संबंधी विवाद –

भारत के राष्ट्रपति के चुनाव में यदि कोई विवाद उत्पन्न होता है।

तो संविधान के अनुच्छेद 71 (1) के अनुसार उस विवाद को भारत के सर्वोच्च न्यायालय को सौंपा जाएगा।

इस विषय में उच्चतम न्यायालय का निर्णय ही अंतिम माना जाएगा।

भारत के राष्ट्रपतियों की सूची एवं उनके कार्यकाल –

क्रमांकराष्ट्रपति का नाम कार्यकालतत्कालीन उपराष्ट्रपति का नामविशेष विवरण
1.डॉ. राजेन्द्र प्रसाद
(1884-1963)
26/01/1950 से 13/05/1962डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनराजेंद्र प्रसाद एक स्वतंत्रता सेनानी थे वह भारत के प्रथम राष्ट्रपति बने। वे बिहार राज्य से थे। वे लगातार दो बार 1952 और 1957 के चुनावों में राष्ट्रपति चुने गए। वे इकलौते ऐसे राष्ट्रपति हैं जोकि दो बार राष्ट्रपति चुने गए।
2.डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन
(1888-1975)
13/05/1962 से 13/05/1967डॉ. जाकिर हुसैनडॉ. एस. राधाकृष्णन 1962 के चुनाव में भारत के राष्ट्रपति चुने गए। वे दर्शनशास्त्री और लेखक थे। साथ ही वे आन्ध्र विश्वविद्यालय और काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति भी रहे।
3.डॉ. ज़ाकिर हुसैन
(1897-1969)
13/05/1967 से 03/05/1969वराहगिरि वेंकट गिरिडॉ. जाकिर हुसैन 1967 के चुनाव में भारत के राष्ट्रपति चुने गए। जाकिर हुसैन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (A.M.U.) के कुलपति भी रहे। इन्हें पद्म विभूषण और भारत रत्न सम्मान भी प्राप्त हुआ। इनका देहान्त पदस्थ रहते हुए हो गया था। पदस्थ राष्ट्रपति ज़ाकिर हुसैन के देहान्त के पश्चात वी.वी. गिरि कार्यवाहक राष्ट्रपति (3 मई 1969 - 20 जुलाई 1969 तक) बने। इनके बाद मु. हिदायतुल्लाह कार्यवाहक राष्ट्रपति (20 जुलाई 1969 - 24 अगस्त 1969 तक) रहे। हिदायतुल्लाह भारत के मुख्य न्यायाधीश (C.J.I.) थे और इन्हें आर्डर ऑफ ब्रिटिश इंडिया भी प्राप्त हुआ था।
4.वराहगिरि वेंकट गिरि
(1894-1980)
24/08/1969 से 24/08/1974गोपाल स्वरुप पाठकवी.वी. गिरि 1969 के चुनाव में भारत के राष्ट्रपति चुने गए। गिरि एकमात्र ऐसे राष्ट्रपति हैं जो कार्यवाहक राष्ट्रपति और राष्ट्रपति दोनों बने। वे भारत रत्न से भी सम्मानित हुए।
5.फखरुद्दीन अली अहमद
(1905-1977)
24/08/1974 से 11/02/1977बासप्पा दनप्पा जत्तीफखरुद्दीन अली अहमद 1974 के चुनाव में राष्ट्रपति चुने गए। इनकी पदस्थ रहते हुए मृत्यु हो गयी। वे डॉ. ज़ाकिर हुसैन के बाद दूसरे ऐसे राष्ट्रपति हैं जो अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए। फ़ख़रुद्दीन अली अहमद की मृत्यु के बाद बी.डी. जत्ती भारत के कार्यवाहक राष्ट्रपति (11 फरवरी 1977 - 25 जुलाई 1977 तक) बने। इससे पहले वह मैसूर राज्य के मुख्यमंत्री थे।
6.नीलम संजीव रेड्डी
(1913-1996)
25/07/1977 से 25/07/1982मुहम्मद हिदायतुल्लाहनीलम संजीव रेड्डी 1977 के चुनाव में राष्ट्रपति चुने गए। वे आन्ध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे। रेड्डी आन्ध्र प्रदेश से चुने गए एकमात्र सांसद थे। वे 26 मार्च 1977 को लोक सभा के अध्यक्ष चुने गए और 13 जुलाई 1977 को यह पद छोड़ दिया और भारत के छठे राष्ट्रपति बने।
7.ज्ञानी जैल सिंह
(1916-1994)
25/07/1982 से 25/071987रामास्वामी वेंकटरमणजैल सिंह 1982 के चुनाव में भारत के राष्ट्रपति चुने गए। वे 1972 में पंजाब के मुख्यमंत्री बने और 1980 में भारत के गृहमंत्री बने।
8.रामास्वामी वेंकटरमण
(1910-2009)
25/07/1987 से 25/07/1992डॉ. शंकर दयाल शर्मा1987 के चुनाव में आर. वेंकटरमण भारत के राष्ट्रपति बने। 1942
में वेंकटरमण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम आन्दोलन में जेल भी गए। जेल से छूटने के बाद वे कांग्रेस पार्टी के सांसद रहे। इसके अतिरिक्त वे भारत के वित्त एवं औद्योगिक मंत्री और रक्षा मंत्री भी रहे।
9.डॉ. शंकर दयाल शर्मा
(1918-1999)
25/07/1992 से 25/07/1997के. आर. नारायणनडॉ. शंकर दयाल शर्मा 1992 के चुनाव में राष्ट्रपति चुने गए। शर्मा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और भारत के संचार मंत्री रहे। और इसके अतिरिक्त वे आन्ध्र प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र के राज्यपाल भी रहे।
10.के. आर. नारायणन
(1920-2005)
25/07/1997 से 25/07/2002कृष्ण कांत 1997 के चुनाव में के. आर. नारायण भारत के राष्ट्रपति चुने गए। नारायणन चीन, तुर्की, थाईलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के राजदूत रहे। उन्हें विज्ञान और कानून में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त थी। वे जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (J.N.U.) के कुलपति भी रह चुके हैं।
11.डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
(1931-2015)
25/07/2002 से 25/07/2007भैरोंसिंह शेखावतडॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम 2002 के चुनाव में भारत के 11 वें राष्ट्रपति चुने गए। कलाम एक वैज्ञानिक थे जिन्होंने मिसाइल और परमाणु हथियार बनाने में मुख्य योगदान दिया। अब्दुल कलाम को भारत का मिसाइल मैन भी कहा जाता है। इन्हें भारत रत्न के सम्मान से सम्मानित किया गया।
12.श्रीमती प्रतिभा पाटिल
(जन्म 1934)
25/07/2007 से 25/07/2012मोहम्मद हामिद अंसारी2007 के चुनाव में प्रतिभा पाटिल भारत की 12 वीं राष्ट्रपति चुनी गयीं। प्रतिभा पाटिल भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति बनीं। वह राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल भी थी।
13.प्रणव मुखर्जी
(जन्म 1935)
25/07/2012 से 25/07/2017मोहम्मद हामिद अंसारीप्रणव मुखर्जी 2012 के चुनाव में राष्ट्रपति चुने गए। प्रणब मुखर्जी भारत सरकार में वित्त मंत्री, विदेश मंत्री, रक्षा मंत्री और योजना आयोग के उपाध्यक्ष रह चुके हैं।
14रामनाथ कोविंद
(जन्म 1 अक्टूबर 1945)
25/07/2017 से अब तकवेंकैया नायडू
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राष्ट्रपति द्वारा प्रमुख अधिकारियों की नियुक्त –

  • राष्ट्रपति अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी की नियुक्त करता है।
  • राष्ट्रपति अनुच्छेद 148 के अनुसार नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्त करता है।
  • अनुच्छेद 155 के अनुसार राष्ट्रपति राज्य के राज्यपालों की नियुक्त करता है।
  • राष्ट्रपति अनुच्छेद 280 (1) के तहत वित्त आयोग के अध्यक्ष की नियुक्त करता है।
  • अनुच्छेद 239क क (5) के तहत संघ शासित क्षेत्रों के मुख्यमंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है।

नोट – राष्ट्रपति उपराष्ट्रपति की नियुक्ति नहीं करता। अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन होता है।

भारत के राष्ट्रपतियों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य –

  • डॉ. राजेन्द्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे, और वे अभी तक पहले व एकमात्र नागरिक हैं जिन्होंने दो कार्यकाल पूरे किये हैं।
  • श्रीमती प्रतिभा पाटिल भारत की 12 वीं तथा प्रथम महिला राष्ट्रपति थीं।
  • राष्ट्रपति के निर्वाचन मण़्डल में राज्य विधानपरिषदों को शामिल नहीं किया गया है।
  • निर्वाचन की भांति महाभियोग की प्रक्रिया में राज्यविधानसभाओं के सदस्यों को शामिल नहीं किया गया है।
  • अनुच्छेद 62 (2) – कार्यकाल पूर्ण होने से पहले राष्टपति का पद रिक्त होने (मृत्यु, पदत्याग, पदच्युत इत्यादि के कारण) की स्थिति में पद को प्रत्येक दशा में 6 माह के भीतर भरा जाना अनिवार्य है।
  • राष्ट्रपति को किसी को क्षमा प्रदान करने की शक्ति अनुच्छेद 72 से प्राप्त होती है।
  • अनुच्छेद 74(1) के अनुसार राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की अनुशंसा पर ही कार्य करेगा।
  • अनुच्छेद 74(1) के अनुसार राष्ट्रपति किसी मामले को मंत्रिपरिषद द्वारा पुनर्विचार के लिए भेज सकता है।
  • संविधान का अनुच्छेद 85 (2) राष्ट्रपति को लोकसभा भंग करने का अधिकार देता है।
  • अनुच्छेद 86 के अनुसार राष्ट्रपति संसद को संदेश भेज सकता है।
  • अनुच्छेद 108 के तहत राष्ट्रपति को संसद की संयुक्त बैठक बुलाने का अधिकार है।
  • राष्ट्रपति अनुच्छेद 111 के तहत संसद द्वारा पास विधेयक को स्वीकृति प्रदान कर सकता है, यह स्वीकृति रोक सकता है, या पुनर्विचार के लिए बापस कर सकता है।
  • धन विधेयक को राष्ट्रपति पुनर्विचार के लिए नहीं लौटा सकता।
  • अनुच्छेद 118 (4) के तहत इस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाएगी।
  • राष्ट्रपति विशेष परिस्थिति में अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश जारी कर सकता है।
  • संसद सत्र शुरु होने के बाद 6 सप्ताह के अन्दर अध्यादेश का अनुमोदन आवश्यक है। अन्यथा यह 6 माह पश्चात स्वतः निष्क्रिय हो जाएगा।
  • राष्ट्रपति दोनों सदनों में चर्चा में भाग नहीं ले सकता।
  • अनुच्छेद 143 राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायलय से परामर्श लेने की शक्ति प्रदान करता है। परंतु न तो उच्चतम न्यायालय परामर्श देने के लिए बाध्य है और न ही राष्ट्रपति दिये गए परामर्श को मानने के लिए। परंतु नैतिकता के आधार पर परामर्श दिया भी जाता है और माना भी जाता है।
  • अनुच्छेद 162 के अनुसार राष्ट्रपति आकस्मिक परिस्थिति में राज्यपाल के कृत्यों के निर्वहन हेतु उपबंध कर सकता है।

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