अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष की ओर मानव का कदम
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अंतरिक्ष विज्ञान, अंतरिक्ष की ओर मानव का कदम – पृथ्वी पर बढ़ती आबादी, घटते संसाधन, विज्ञान का विकास और मानव की जिज्ञासा ने आधुनिक मानव को पृथ्वी के तमाम रहस्यों को जानने के बाद अंतरिक्ष के बारे में जानने को उत्सुक किया और तब मानव ने एक नए विकल्प के तौर पर अंतरिक्ष की और ध्यान दिया और भविष्य में इसकी ओर कदम ढ़ाने और नए विकल्प खोजने का एक नया अध्याय शुरू किया। जैसे-जैसे विज्ञान में नए अविष्कार होते गए हमारे अंदर जानने की उत्सुकता और भी बढ़ती गयी। आइये जानते हैं मानव द्वारा अंतरिक्ष की और बढ़ाये गए कदम और किये गए प्रयासों को क्रमानुसार –

स्पूतनिक प्रथम-

पूर्व सोवियत संघ द्वारा 4 अक्टूबर 1957 को कजाकिस्तान के बैकानूर अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्र से प्रक्षेपित किया गया यह पहला उपग्रह और मानव द्वारा अंतरिक्ष की ओर बढ़ाया गया यह पहला कदम था। इस उपग्रह का बजन मात्र 84 किलो ग्राम था। इसने पृथ्वी की एक परिक्रमा करने में महज 96.2 मिनट का समय लिया। यह 4 जनवरी 1958 को पृथ्वी के वातावरण में गिर गया और जलकर नष्ट हो गया।

स्पूतनिक द्वितीय –

3 नवम्बर 1957 सोवियत संघ द्वारा प्रक्षेपित यह दूसरा उपग्रह था।  इस उपग्रह द्वारा अंतरिक्ष में जीवित प्राणी को ले जाने का प्रथम प्रयास लाइका नामक कुतिया को भेजकर किया गया था जिससे भविष्य में मानव को अंतरिक्ष में भेजे जाने के नए विकल्प खोजे जा सकें।  परन्तु यह प्रयास असफल रहा और लाइका की मौत हो गयी।

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लूना तृतीय –

4 अक्टूबर 1959 को सोवियत संघ द्वारा प्रक्षेपित यह पहला उपग्रह था जिसने चन्द्रमा के उस पृष्ठ के चित्र भेजे जो पृथ्वी से नजर नहीं आता है।

वोस्टॉक प्रथम –

12 अप्रेल 1961 को सोवियत संघ द्वारा स्थापित यह पहला ऐसा उपग्रह था जिसके द्वारा मानव को अंतरिक्ष में भेजा गया।  इसी यान द्वारा मेजर यूरी गागरिन ने पृथ्वी की सतह से निकल कर परिक्रमण किया और विश्व के पहले अंतरिक्ष यात्री बने।

वोस्टॉक -6

4 दिसंबर 1963 को सोवियत संघ द्वारा प्रक्षेपित यह पहला यान था जिसके माध्यम से विश्व की प्रथम महिला अंतरिक्ष यात्री वेलेंटिना टेरेस्कोवा ने अंतरिक्ष में भ्रमण किया।

इंटेलसेट

6 अप्रेल 1965 को व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रक्षेपित यह विश्व का पहला संचार उपग्रह था।

वेरेना-3 

किसी अन्य गृह पर उतरने वाला यह पहला यान बना जो पृथ्वी के सबसे करीबी गृह शुक्र की सतह पर 16 नवम्बर 1965 को उतरा।

लूना-9

चन्द्रमा के तल पर सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला यान।

सोयूज-4

यह सबसे पहला प्रयोगात्मक केंद्र था।

अपोलो-11

16 जुलाई 1969 को मेरिट आइलैंड पर स्थित केनेडी स्पेस सेंटर लांच काम्प्लेक्स 39 से उड़ान भरकर अंतरिक्ष की ओर मानव की यह सबसे बड़ी सफलता थी जब पहली बार  20 जुलाई 1969 को अंतर्राष्ट्रीय समयानुसार 20:17:39 बजे अपोलो-11 मानवयुक्त यान के द्वारा नील आर्म स्ट्रांग और एडविन एल्ड्रिन ने चन्द्रमा की सतह पर कदम रखा। यह नासा का तीसरा चंद्र मिशन था।  अंतरिक्ष के क्षेत्र में अमेरिका के साथ साथ आधुनिक मानव की ये बहुत बड़ी सफलता थी जिसने अन्य देशों का भी इस ओर ध्यान आकर्षित किया।  24 जुलाई को तीनो अंतरिक्ष यात्री बापस पृथ्वी पर उतरे।

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मार्स-2

मंगल गृह की सतह पर उतरने वाला यह पहला यान था।

चंद्र मिशन

प्रथम चंद्र अभियान सोवियत संघ ने 2 जनवरी 1959 को भेजा था।

द्वितीय चंद्र अभियान अमेरिका ने 3 मार्च 1959 को भेजा था।

चंद्रयान-1

यह भारत का पहला (विश्व का 68 वां) चंद्र मिशन है जिसका प्रक्षेपण भारत ने 22 अक्टूबर 2008 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया। इस मिशन के बाद भारत विश्व का छठा देश बन गया है जोकि चाँद तक सफलतापूर्वक पहुँचा है।

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