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संधि विच्छेद (Sandhi Viched)

sugamgyan

Dec 22, 2018

संधि-विच्छेद

संधि विच्छेद

संधि की परिभाषा :-  दो वर्णों के विकार से उत्पन्न मेल को संधि कहते हैं। संधि के लिए दो वर्णों को निकट होना आवश्यक होता है। वर्णों की इस निकट स्थिति को संहिता कहते हैं।

संधियों के प्रकार :- संधियां तीन प्रकार की होती हैं – स्वर संधि, व्यंजन संधि और विसर्ग संधि

स्वर संधि

स्वर संधि 5 प्रकार की होती है।

(1) दीर्घ संधि (2) गुण संधि (3) वृद्धि संधि (4) यण संधि (5) अयादि संधि

1. दीर्घ संधि 

संधिविच्छेद
शब्दार्थशब्द + अर्थ
परमार्थपरम + अर्थ
सेवार्थसेवा + अर्थ
शरणार्थीशरण + अर्थी
शिक्षार्थीशिक्षा + अर्थी
सत्यार्थीसत्य + अर्थी
विद्यार्थीविद्या + अर्थी
पुस्तकार्थीपुस्तक + अर्थी
परीक्षार्थीपरीक्षा + अर्थी
धनार्थीधन + अर्थी
कल्पान्तकल्प + अंत
उत्तमांगउत्तम + अंग
दैत्यारिदैत्य + अरि
देहान्तदेह + अन्त
वेदान्तवेद + अन्त
सूर्यास्तसूर्य + अस्त
रामावतारराम + अवतार
रामायणराम + अयन
शिवायनशिव + अयन
अन्नाभावअन्न + अभाव
पुष्पावलीपुष्प + अवली
चरणामृतचरण + अमृत
स्वर्गावसरस्वर्ग + अवसर
हिमालयहिम + आलय
शिवालयशिव + आलय
परमात्मापरम + आत्मा
रत्नाकररत्न + आकर
कुशासनकुश + आसन
पुस्तकालयपुस्तक + आलय
देवालयदेव + आलय
रामाधारराम + आधार
रामाश्रयराम + आश्रय
धर्मात्माधर्म + आत्मा
परमानन्दपरम + आनन्द
नित्यानन्दनित्य + आनन्द
परमावश्यकपरम + आवश्यक
भोजनालयभोजन + आलय
विद्याभ्यासविद्या + अभ्यास
मायाधीनमाया + अधीन
करुणावतारकरुणा + अवतार
तथापितथा + अपि
युवावस्थायुवा + अवस्था
आज्ञानुसारआज्ञा + अनुसार
कवीन्द्रकवि + इन्द्र
रवीन्द्ररवि + इन्द्र
महीन्द्रमही + इन्द्र
गिरीन्द्रगिरि + इन्द्र
अभीष्टअभि + इष्ट
हरीशहरि + ईश
कवीशकवि + ईश
गिरीशगिरि + ईश
कपीशकपि + ईश
बुद्धीशबुद्धि + ईश
रतीशरति + ईश
नदीशनदी + ईश
जानकीशजानकी + ईश
महीशमही + ईश
पृथ्वीशपृथ्वी + ईश
रजनीशरजनी + ईश
कवीच्छाकवि + इच्छा
लक्ष्मीच्छालक्ष्मी + इच्छा
मुनीश्वरमुनि + ईश्वर
भारतीश्वरभारती + ईश्वर
भानूदयभानु + उदय
लघूक्तिलघु + उक्ति
कटूक्तिकटु + उक्ति
सूक्तिसु + उक्ति
रघूत्तमरघु + उत्तम
मृत्यूपरांतमृत्यु + उपरांत
लघूर्मिलघु + ऊर्मि
मंजूषामंजु + ऊषा
सिन्धूर्मिसिन्धु + ऊर्मि
वधूत्सववधू + उत्सव
भूपरिभू + उपरि
वधूल्लासवधू + उल्लास
भूत्तमभू + उत्तम
मतृणाममातृ + ऋणाम्
होतृकारहोतृ + ऋकार

2. गुण संधि –

संधिविच्छेदविच्छेदसंधिविच्छेदविच्छेद
देवेन्द्रदेवइन्द्रसुरेन्द्रसुरइन्द्र
उपेंद्रउपइन्द्रनरेंद्रनरइन्द्र
प्रेतप्रइतसुरेशसुरईश
नरेशनरईशखगेशखगईश
देवेशदेवईशगणेशगणईश
सूर्योदयसूर्यउदयजलोदयजलउदय
चन्द्रोदयचन्द्रउदयपरोपकारपरउपकार
परमोत्सवपरमउत्सवलोकोपयोगलोकउपयोग
जलोर्मिजलऊर्मिसमुद्रोर्मिसमुद्रऊर्मि
दीर्घोपलदीर्घऊपलदेवर्षिदेवऋषि
महेंद्रमहाइन्द्ररमेशरमाईश
महेश्वरमहाईश्वरमहेशमहाईश
महोत्सवमहाउत्सवमहोपदेशमहाउपदेश
गंगोर्मिगंगाऊर्मिमहोर्जस्वीमहाऊर्जस्वी
महोर्मिमहाउर्मिमहर्षिमहाऋषि
सप्तर्षिसप्तऋषिराजर्षिराजऋषि

3. वृद्धि संधि

तत्रैव = तत्र + एव

एकैव = एक + एव

एकैक = एक + एक

दिनैक = दिन + एक

मतैक्य = मत = ऐक्य

धर्मैक्य = धर्म + ऐक्य

विश्वैक्य = विश्व + ऐक्य

नवैश्वर्य = नव + ऐश्वर्य

परमौज = परम + ओज

जलौस = जल + ओस

परमौषध = परम + औषध

परमौदार्य = परम + औदार्य

सर्वदैव = सर्वदा + एव

सदैव = सदा + एव

एकदैव = एकदा + एव

तथैव = तथा + एव

महैश्वर्य = महा +ऐश्वर्य

महौज = महा + ओज

महौदर्य = महा + औदार्य

महौषध = महा + औषध

4. यण संधि –

संधिविच्छेदविच्छेद
यद्यपियदिअपि
अध्ययनअधिअयन
अत्यर्थइतिअर्थ
अत्यधिकअतिअधिक
रीत्यनुसाररीतिअनुसार
इत्यादिइतिआदि
अत्याचारअतिआचार
अत्यावश्यकअतिआवश्यक
प्रत्युत्तरप्रतिउत्तर
प्रत्युपकारप्रतिउपकार
प्रत्युत्तरप्रतिउत्तर
उपर्युक्तउपरिउक्त
अत्युक्तिअतिउक्ति
अत्युत्तमअतिउत्तम
न्यूननिऊन
वाण्यूर्मिवाणिऊर्मि
प्रत्येकप्रतिएक
अत्यंतअतिअंत
नाद्यर्पणनदीअर्पण
देव्यर्थदेवीअर्थ
देव्यागमदेवीआगम
देव्यालयदेवीआलय
सख्यागमसखीआगम
सरस्वत्याराधनासरस्वतीआराधना
सख्युचितसखीउचित
देव्युक्तिदेवीउक्ति
देव्यैश्वर्यदेवीऐश्वर्य
देव्योजदेवीओज
दिव्यौदार्यदेवीऔदार्य
देव्यंगदेवीअंग
मन्वन्तरमनुअन्तर
अन्वयअनुअय
अन्वर्थअनुअर्थ
मध्वरिमधुअरि
ऋत्वन्तऋतुअन्त
स्वागतसुआगत
मध्वालयमधुआलय
अन्वादेशअनुआदेश

5. अयादि संधि

नयन = ने + अन

शयन = शे + अन

चयन = चे + अन

गायक = गै + अक

गायन = गै + अन

गवीश = गो + ईश

रवीश = रो + ईश

पवित्र = पो + इत्र

पवन = पो + अन

पावन = पौ + अन

श्रवण = श्री + अन

गवन = गो + अन

भवन = भो + अन

पावक = पौ + अक

न्यून = ने + ऊन

अन्वित  = अनु + इत

धात्विक = धातु + इक

अन्वेषण = अनु + एषण

वध्वेषण = वधू + एषण

पित्रनुमति = पितृ + अनुमति

मात्रंग = मातृ + अंग

वध्वादेश = वधू + आदेश

वध्वीर्षया = वधू + ईर्ष्या

वध्वंग = वधू + अंग

मात्रानन्द = मातृ + आनन्द

मात्रादेश = मातृ + आदेश

भ्रात्रोक = भ्रातृ + ओक

व्यंजन संधि के उदाहरण और संधि-विच्छेद

संधिविच्छेदविच्छेदसंधिविच्छेदविच्छेद
वागीशवाक्ईशदिगम्बरदिक्अम्बर
दिगन्तरदिक्अन्तरवाग्जालवाक्जाल
दिग्गजदिक्गजवाग्धारावाक्धारा
दिग्भ्रमदिक्भ्रमअजन्तअच्अन्त
अजादिअच्आदिषडाननषट्आनन
तदिच्छातत्इच्छासदाचारसत्आचार
वृहद्रथवृहत्रथतद्रूपतत्रूप
सदाशयसत्आशयसदानन्दसत्आनन्द
सदुपयोगसत्उपयोगजगदीशजगत्ईश
उदयउत्अयकृदन्तकृत्अन्त
सद् वाणीसत्वाणीजगदानन्दजगत्आनन्द
सुबन्तसुप्अन्तअब्जअप्
अब्धिअप्धिअम्मयअप्मय
एतन्मुरारीएतत्मुरारीजगन्नाथजगत्नाथ
वाग्दत्तवाक्दत्तभगवद्भक्तिभगवत्भक्ति
षडदर्शनषट्दर्शनउद्योगउत्योग
सदवंशसत्वंशउद्घाटनउत्घाटन
षण्मासषट्मासचिन्मयचित्मय
भगवद्गीताभगवत्गीतादिग्गजदिक्गज
उद्गमउत्गमसन्मार्गसत्मार्ग
उन्नतिउत्नतिउच्चारणउत्चारण
महच्छत्रमहत्छत्रउच्छेदउत्छेद
सच्छात्रसत्छात्रशरच्चन्द्रशरत्चन्द्र
सच्चितसत्चित्उच्चाटनउत्चाटन
पच्छेदपद्छेदसज्जनसत्जन
उज्ज्वलउत्ज्वलविपज्जालविपद्जाल
उड्डयनउत्डयनतल्लीनतत्लीन
उल्लंघनउत्लंघनउल्लासउत्लास
सच्छास्त्रसत्शास्त्रउच्छवासउत्श्वास
उच्छिष्टउत्शिष्टउच्छृंखलाउत्शृंखला
महच्छक्तिमहत्शक्तिउद्धारउत्हार
उद्धतउत्हतउद्धहरणउत्हरण
किंवाकिम्वासंयोगसम्योग
संयमसम्यमसंतापसम्ताप
संसारसम्सारसंहारसम्हार
संवादसम्वादसंशयसम्शय
संवेगसम्वेगसंकल्पसम्कल्प
संचयसम्चयसंपर्कसम्पर्क
संक्रान्तिसम्क्रान्तिसंतोषसम्तोष
सम्पूर्णसम्पूर्णपंचमपम्चम
भरणभर्अनप्रमाणप्रमान
भूषणभूष्अन   

विसर्ग संधि के उदाहरण –

संधिविच्छेदविच्छेदसंधिविच्छेदविच्छेद
निश्छलनिःछलकश्चितकःचित्
धनुष्टंकारधनुःटंकारनिश्चयनिःचय
निष्चेष्टनिःचेष्टततष्ठकारततःठकार
निश्चलनिःचलदुष्टदुः
मनस्तापमनःतापनिस्तेजनिःतेज
दुस्तरदुःतरनिश्छिद्रनिःछिद्र
निस्तारनिःतारदुशासन/दुःशासनदुःशासन
हरिशतेहरिःशतेनिशंकनिःशंक
निस्सारनिःसारनिस्संदेहनिःसंदेह
रजःकणरजःकणअंतःकरणअन्तःकरण
अंतःपुरअन्तःपुरप्रातःकालप्रातःकाल
पुरस्कारपुरःकारमनोकामनामनःकामना
नमस्कारनमःकारतिरस्कारतिरःकार
दुःखदुःनिष्कपटनिःकपट
निष्फलनिःफलनिष्पापनिःपाप
निष्पंकनिःपंकचतुष्पदचतुःपद
दुष्कर्मदुःकर्मदुष्प्रकृतिदुःप्रकृति
दुष्करदुःकरदुष्फलदुःफल
मनोजमनःवयोवृद्धवयःवृद्ध
अधोघाटअधःघाततपोबलतपःबल
तेजोमयतेजःमयपयोदपयः
पुरोहितपुरःहितयशोलाभयशःलाभ
सरोवरसरःवरयशोगानयशःगान
मनोबलमनःबलतमोगुणतमःगुण
मनोराज्यमनःराज्यतपोधनतपःधन
अधोगतिअधःगतियशोदायशःदा
अधोजलअतःजलमनोरथमनःरथ
मनोज्ञमनःज्ञमनोयोगमनःयोग
मनोवेगमनःवेगमनोहरमनःहर
यशोधरायशःधरामनोनयनमनःनयन
मनोविकारमनःविकारपयोधरपयःधर
निराशानिःआशानिर्दयनिःदय
निर्झरनिःझरनिर्जरनिःजर
निर्गुणनिःगुणनिर्भयनिःभय
निस्संदेहनिःसंदेहनिर्यातनिःयात
निर्हारनिःहारनिरैक्यनिःऐक्य
निरेकीभावनिःएकीभावनिर्घोषनिःघोष
निर्गमनिःगमनिराधारनिःआधार
निरुपायनिःउपायनिरौषधनिःऔषध
निरादरनिःआदरनिरीहनिःईह
निरर्थकनिःअर्थकदुरुपयोगदुःउपयोग
दुर्दशादुःदशादुर्गुणदुःगुण
दुर्जनदुःजनदुर्भाग्यदुःभाग्य
दुश्शीलदुःशीलदुर्बलदुःबल
दुर्वचनदुःवचनदुर्यशदुःयश
दुर्लाभदुःलाभदुर्लक्ष्यदुःलक्ष्य
दुर्गन्धदुःगंधदुरात्मादुःआत्मा
दुर्धर्षदुःधर्षदुर्नामदुःनाम
वहिर्गतवहिःगतनिरोकनिःओक
निरंकनिःअंकनिरुत्तरनिःउत्तर
नीरसनिःरसनीरोगनिःरोग
नीरजनिःरजनीरवनिःरव
अतएवअतःएवनिर्गुणनिःगुण

संधि को और अच्छे से समझने के लिए आप हमारी इस वीडियो को पूरा देखें –

 

 

 

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