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सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय

sugamgyan

Oct 31, 2018

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सरदार वल्लभ भाई पटेल का जीवन परिचय (Sardar Vallabh Bhai Patel Biography) – संपूर्ण देश में लौहपुरुष के नाम से जाने जाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और आजाद भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत की महान विभूतियों में से एक है। इन्हें भारत के एकीकरण का जनक कहा जाता है। भारत की आजादी के बाद भारत की तमाम रियासतों को एक कर एक अखंड भारत के निर्माण में इनका सबसे प्रमुख योगदान रहा।

जन्म व प्रारंभिक जीवन –

सरदार वल्लभ भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 ईo को ब्रिटिश भारत के बम्बई प्रान्त के नडियाड में एक किसान परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम झबेर भाई पटेल और माता का नाम लड़बा देवी था। ये अपने माता पिता की चौथी संतान थे। इनके अन्य भाइयों का नाम सोमाभाई, नरसी भाई और विट्ठल भाई पटेल था। इन्होंने बैरिस्टर की पढ़ाई लंदन से की और वापस आने के बाद अहमदाबाद में वकालत करने लगे। ये महात्मा गाँधी के विचारों से अत्यधिक प्रभावित थे और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में कूद पड़े।

खेड़ा आंदोलन –

स्वतंत्रता आंदोलन में वल्लभ भाई पटेल का पहला कदम खेड़ा आंदोलन था। बम्बई का खेड़ा खंड उस समय बहुत बुरी तरह सूखे का शिकार हुआ और तभी किसानों ने सरकार से कर माफ़ी के दरख्वास्त की परन्तु उनकी मांग नहीं मानी गयीं। तब सरदार वल्लभ भाई पटेल और गाँधी व अन्य नेताओं ने किसानों का नेतृत्व किया और सरकार को किसानों की मांग माननी पड़ी। राष्ट्रीय आंदोलन में पटेल की पहली सफलता थी।

बारदोली सत्याग्रह –

1928 ईo में हुआ यह आंदोलन भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण घटना है। सरकार ने किसानो पर 30% लगान बढ़ा दिया जिससे उनकी स्थिति गड़बड़ाने लगी और इससे निजात दिलाने हेतु आंदोलन के लिए पटेल को आमंत्रित किया गया। इसी आंदोलन की सफलता के बाद बारदोली की महिलाओं के कहने पर महात्मा गाँधी ने पटेल को सरदार की उपाधि दी।

देसी रियासतों का एकीकरण –

ब्रिटिश शासन की फूट डालो शासन की नीतियों का बीज जो दशकों पहले बोया था उसका असर आजादी के बाद तक ख़त्म न किया जा सका। 1947 ईo में जब भारत को आजाद करना तय हो गया तो एक नहीं बल्कि दो राष्ट्रों यथा भारत और पाकिस्तान का निर्माण हुआ। साथ ही उस समय ब्रिटिश भारत के अंतर्गत 562 देसी रियासतों को इनमें से किसी एक राज्य में जाने या स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया गया। आजादी के बाद यही सबसे बड़ी समस्या साबित हुयी। क्योंकि अधिकतर रियासतें आजाद रहना चाहती थीं। परन्तु वल्लभ भाई पटेल और वीपी मेनन ने मिलकर लगभग सभी रियासतों को भारत में विलय के पक्ष में कर ही लिया। परन्तु तीन रियासतों हैदराबाद, जूनागढ़ और जम्मू कश्मीर ने विलय के पक्ष में अपनी सहमति नहीं दी। तब पटेल ने ऑपरेशन पोलो चलाया। जूनागढ़ की अधिकांश जनता हिन्दू थी लेकिन वहां का नवाब मुस्लिम था और पाकिस्तान में विलय के पक्ष में था। वहां जनता ने विद्रोह कर दिया और नवाब पाकिस्तान भाग गया। वहां पर जनमत संग्रह कराया गया और इस तरह जूनागढ़ भारत में मिल गया। हैदराबाद का नवाब भी पाकिस्तान में जाने के पक्ष में था लेकिन उसकी भौगोलिक स्थिति पकिस्तान के पक्ष में जाने पर भारत के लिए अनुकूल नहीं थी और अखंड भारत के सपने के बीच आ रही थी। अतः वहां पर सेना भेज दी गयी और सैन्य कार्यवाही के आधार पर हैदराबाद को भारत में मिला लिया गया। उधर कश्मीर की समस्या तो ऐसी उठी कि आज तक न सुलझ सकी। आजादी के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच सांप्रदायिक दंगो के कारण युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न हो गयी थी। इसी के अंतर्गत पाकिस्तानी कबायलियों ने कश्मीर पर हमला कर दिया और उसके बहुत बड़े भू-भाग पर कब्ज़ा कर लिया। तब राजा हरिसिंह ने भारत के पक्ष में विलयपत्र पर हस्ताक्षर किये और इस तरह कश्मीर भी भारत में सम्मिलित हो गया परन्तु इसके बहुत बड़े हिस्से पर आज तक पाकिस्तान का कब्ज़ा है, जिसे पाक अधिकृत कश्मीर (POK) कहते हैं।

राजनीतिक जीवन –

सरदार वल्लभ भाई पटेल 15 अगस्त 1947  को आजाद भारत के प्रथम उप-प्रधानमंत्री (गृहमंत्री) बने और 15 दिसंबर 1950 तक (मृत्युपर्यन्त) पद पर रहे।

मृत्यु –

इनका निधन 15 दिसंबर 1950 को 75 वर्ष की अवस्था में बम्बई में हो गया।

स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी ( Statue of Unity )

सरदार वल्लभ भाई पटेल

पटेल की इस मूर्ति का शिलान्यास 31 अक्टूबर 2013 को पटेल की 138वीं जयंती के उपलक्ष्य में गुजरात के तात्कालिक मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। परन्तु इसका निर्माण 19 दिसंबर 2015 को प्रारम्भ हुआ। इसके निर्माण में 33 माह का समय लगा और इसका उद्घाटन पटेल की 143 वीं जयंती पर 31 अक्टूबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। जब इसका उद्घाटन हुआ तब यह विश्व की सबसे ऊँची (182 मीटर) मूर्ति बनी। इस मूर्ति का निर्माण राम वी सुतार ( 2016 ईo में पद्म भूषण से सम्मानित ) की देखरेख में हुआ। यह प्रतिमा नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध से महज 3.5 किलो मीटर दूरी पर स्थित है।

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