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धारा 370 समाप्त, जम्मू-कश्मीर अब विशेष राज्य नहीं

sugamgyan

Aug 8, 2019

धारा 370 समाप्त, जम्मू-कश्मीर अब विशेष राज्य नहीं main image

धारा 370 समाप्त, जम्मू-कश्मीर अब विशेष राज्य नहींभारत के संविधान का अनुच्छेद 370 भारतीय संसद की विधायी शक्तियों को जम्मू-कश्मीर में लागू होने से रोकता था। इसी के तहत रक्षा, संचार और विदेश मामलों के अतिरिक्त भारतीय संसद जम्मू-कश्मीर को लेकर कोई कानून नहीं बना सकती थी। धारा 370 को भारतीय संविधान में 17 अक्टूबर 1949 को जोड़ा गया था।

कश्मीर विलय से पूर्व की घटना –

भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम-1947 के तहत भारत के अंतर्गत आने वाली सभी रियासतों को तीन विकल्प दिए गए। पहला – वे भारत में शामिल हो सकते हैं, दूसरा – वे पाकिस्तान में शामिल हो सकते हैं, तीसरा- वे स्वतंत्र रह सकते हैं। जम्मू-कश्मीर ने स्वतंत्र रहने का विकल्प चुना। परंतु यह स्वतंत्रता ज्यादा दिन न टिक सकी।

जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय का कारण –

बंटवारे के बाद पाकिस्तान ने 22 अक्टूबर 1947 को कवायली जनजातियों के साथ अपने सैनिक जम्मू-कश्मीर पर हमला करने भेज दिए। इन्होनें पुंछ का एक बहुत बड़ा क्षेत्र अपने कब्जे में ले लिया। 24 अक्टूबर 1947 को इन्होंने बारामुला पर कब्जा कर लिया। महाराजा हरिसिंह कश्मीर की रक्षा न कर सके औऱ उनके पास एकमात्र विकल्प था भारत से सहायता मांगना। परंतु भारत ने सहायता के बदले उनसे भारत में विलय होने की शर्त रखी। तब 26 अक्टूबर 1947 को राजा हरिसिंह ने विलयपत्र पर हस्ताक्षर कर दिये। तात्कालिक गवर्नर जरनल लॉर्ड माउंटबेटन ने 27 अक्टूबर 1947 को इसे स्वीकार कर लिया। फिर वहां पर भारतीय सेना भेज दी गई औऱ इस तरह जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा बन गया परंतु तब तक जम्मू-कश्मीर के एक बहुत बड़े हिस्से पर घुसपैठिए कब्जा कर चुके थे। इसी क्षेत्र को आज POK (Pak Occupied Kashmir/ पाक अधिकृत कश्मीर) के नाम से जाना जाता है। यह विलयपत्र पूर्णतः अस्थाई व तात्कालिक था।

धारा 370 को खत्म करने संबंधी बिल –

कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली इस धारा को खत्म करने हेतु प्रस्ताव 05 अगस्त 2019 को गृहमंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत किया गया। इसके बाद घंटों तक चली बहस के बाद इसे राज्यसभा से पास कर दिया गया। इसके पक्ष में 125 और विपक्ष में 61 वोट पड़े।

कश्मीर का संविधान –

इसी अनुच्छेद के अनुसार कश्मीर का अपना संविधान होना तय हुआ था। नवंबर-1956 मे जम्मू-कश्मीर राज्य का अपना संविधान बनकर तैयार हुआ। इसके बाद 26 जनवरी 1957 को राज्य का अपना पृथक संविधान लागू किया गया।

कैसा होगा नए राज्यों का स्वरूप –

पहले के जम्मू-कश्मीर के दो टुकड़े कर अब उसे पूर्ण राज्य की जगह दो केंद्रशासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में विभाजित कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर की व्यवस्था दिल्ली जैसी की गई है, जम्मू-कश्मीर की अपनी विधानसभा होगी। इसके विपरीत लद्दाख क्षेत्र को पूर्ण रूप से केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है। दोनों ही केंद्रशासित प्रदेशों में राज्यपाल की जगह अब उपराज्यपाल की नियुक्ति की जाएगी। इस धारा को खत्म करने के बाद भारत में राज्यों की कुल संख्या 28 और केंंद्र शासित प्रदेशों की संख्या 09 हो गई है।

जम्मू-कश्मीर (केंद्रशासित प्रदेश)

इसमें वर्तमान जम्मू औऱ कश्मीर का क्षेत्र शामिल होगा। दिल्ली की तरह ही इस केंद्रशासित प्रदेश की भी अपनी विधानसभा होगी। इसमें कुल 107 विधायक होंगे, साथ ही गुलाम कश्मीर की 24 सीटें खाली रखी जाएंगी। विधानसभा का कार्यकाल 05 वर्ष का होगा, जोकि अब तक 06 वर्ष का होता था। नई व्यवस्था में उप-राज्यपाल को यदि लगता है कि विधानसभा में महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है, तो वह दो महिला सदस्यों को मनोनीत कर सकता है। यहां के मंत्रिपरिषद की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 10 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर की चार सीटें यथास्थित रहेंगी। लोकसभा में यहां से पांच सीटें होंगी। इसकी कानून व्यावस्था केंद्र सरकार के हाथों में होगी। यहां का प्रशासन पुडुचेरी की भांति संविधान के अनुच्छेद 239ए के तहत संपन्न हुआ करेगा।

लद्दाख (केंद्रशासित प्रदेश)

लद्दाख को पूर्ण रूप से केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया है। इसका प्रशासन चंडीगढ़ जैसा होगा। यहां पर न तो विधानसभा का गठन होगा औऱ न ही राज्यसभा की कोई सीट। यहां पर भी एक उप-राज्यपाल की नियुक्ति की जाएगी। लद्दाख से एक लोकसभा सीट रहेगी।

धारा-370 के  विशेष उपबंध क्या थे ?

  • जम्मू-कश्मीर का अपना झंडा व संविधान होगा।
  • जम्मू कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 06 वर्ष का होगा, जबकि भारत के अन्य राज्यों का कार्यकाल 05 वर्ष होता है।
  • जम्मू कश्मीर राज्य में दोहरी नागरिकता का प्रावधान, अर्थात वहां के लोगों के पास भारत की नागरिकता के साथ राज्य की नागरिकता भी होगी।
  • यहां की कोई महिला यदि भारत के किसी अन्य राज्य के नागरिक ने शादी कर लेती है तो उसकी राज्य वाली नागरिकता समाप्त हो जाती है।
  • राज्य के बाहर के लोगों को यहां जमीन खरीदने, संस्थानों में दाखिला लेने और सरकारी नौकरी पाने का भी अधिकार नहीं था।
  • भारत की संसद यहां के संबंध में सीमित कानून ही बना सकती है।
  • रक्षा, संचार और विदेश मामलों के अतिरिक्त किसी संबंथ में यहां कानून लागू करने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की मंजूरी लेनी पड़ती थी।
  • यहां हिंदू, सिख आदि अल्प-संख्यकों के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं था।
  • यहां सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार भी लागू नहीं था।
  • यहां पर भारतीय दंड संहिता की जगह रणवीर दंड संहिता लागू थी।
  • यहां पर भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय मान्य नहीं थे।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद-356 लागू नहीं होगा।
  • यहां पर राज्य के बाहर का नागरिक न तो मतदान कर सकता था और न ही निर्वाचित हो सकता था।

धारा 370 हटाए जाने के बाद की स्थिति-

  • अब जम्मू-कश्मीर दिल्ली की तरह केंद्र शासित प्रदेश होगा, जिसकी अपनी विधानसभा होगी। यहां पर एक उपराज्यपाल की नियुक्ति की जाएगी।
  • लद्दाख पूरी तरह से केंद्रशासित प्रदेश होगा जिसका प्रशासन चंडीगढ़ जैसा होगा।
  • जम्मू-कश्मीर का अलग झंडा नहीं होगा, बल्कि भारत का राष्ट्र ध्वज तिरंगा ही राज्य का भी ध्वज होगा।
  • जम्मू कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल अब अन्य राज्यों की भांति 05 वर्ष का ही होगा।
  • जम्मू कश्मीर राज्य में भी अब इकहरी नागरिकता होगी, अर्थात अब राज्य का हर नागरिक सिर्फ भारत का ही नागरिक होगा।
  • अब यहां की कोई भी स्त्री किसी यदि किसी भारतीय से शादी करती है तो दोनो भारत के नागरिक होंगे।
  • राज्य के बाहर के लोग अब यहां जमीन खरीद सकते हैं, संस्थानों में दाखिला ले सकते हैं और सरकारी नौकरी भी पा सकेंगे।
  • भारत की संसद यहां के संबंध में अब विस्तृत कानून बना सकती है।
  • रक्षा, संचार और विदेश मामलों के अतिरिक्त किसी संबंथ में यहां कानून लागू करने के लिए केंद्र को राज्य सरकार की मंजूरी लेने की आवश्याकता नहीं।
  • यहां हिंदू, सिख आदि अल्पसंख्यकों के लिए अब 16 प्रतिशत के आरक्षण का प्रावधान होगा।
  • यहां सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार के तहत अन्य अधिकार भी लागू होंगे।
  • यहां पर रणवीर दंड संहिता की जगह अब आईपीसी लागू होगी।
  • यहां पर भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय अब मान्य होंगे।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद-356 अब लगाया जा सकता है।
  • यहां पर राज्य के बाहर के नागरिक को अब मतदान करने औऱ विर्वाचित होने का अधिकार होगा।

अनुच्छेद 35-ए

महारजा हरिसिंह द्वारा इस कानून को सबसे पहले सन् 1927 में लागू किया गया। परंतु भारत में इसका वर्तमान रूप 14 मई 1954 को लागू हुआ। इसके लागू होने के समय वहां रहने वाले औऱ 10 साल बाद तक जम्मू-कश्मीर में आकर बसने वालों को वहां का स्थाई नागरिक मान लिया गया। इसी अनुच्छद के अनुसार यहां के स्थाई नागरिकों की व्याख्या की गई है। इसी के तहत राज्य से बाहर का कोई नागरिक यहां न तो सम्पत्ति खरीद सकता था और न ही यहां रोजगार पा सकता था।

अनुच्छेद – 370 (3)

इसके अनुसार भारत का राष्ट्रपति सार्वजनिक सूचना जारी कर धोषणा कर सकते हैं कि यह धारा (अनुच्छेद-370) निष्क्रिय होगी या अपवाद अथवा संशोधन के साथ सक्रिय होगी।

अनुच्छेद – 368

भारतीय संविधान के अनिच्छेत-368 के तहत संसद को यह अधिकार प्राप्त है कि वह संविधान में संशोधन कर किसी भी धारा को हटा सकता है और जोड़ भी सकता है।

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