भारत की प्रमुख बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं

नदियों के जल को मानव-हित में प्रयोग करने के लिए विभिन्न परियोजनाएं विकसित की गयी हैं| नदियों की घाटियों पर बड़े-बड़े बांध बनाकर अनेक सुविधायें जैसे ऊर्जा, सिंचाई एवं पर्यटन स्थल प्राप्त किये जाते हैं, इसीलिए इन परियोजनाओं को बहु-उद्देश्यीय नदी घाटी परियोजना कहा जाता है| इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य किसी नदी घाटी के अंतर्गत आने वाले जल एवं थल का पूर्ण रूप से मानव-हित में प्रयोग करना होता है| भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को ‘आधुनिक भारत का मंदिर’ कहा था|

भारत की प्रमुख बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएं ( Important Multipurpose River Valley Projects in India )-

परियोजना नदी सम्बन्धित/लाभान्वित राज्य/देश टिप्पणी
सरदार सरोवर परियोजना नर्मदा गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान इसका निर्माण गुजरात राज्य में नर्मदा नदी पर नवगांव के पास 138.68 मी. ऊँचे बांध से किया गया है | इससे 1450 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा |
भाखड़ा-नांगल परियोजना सतलुज पंजाब, हरियाणा, राजस्थान एवं हिमाचल प्रदेश यह परियोजना पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान राज्यों का संयुक्त उपक्रम है |
शिवसमुद्रम कावेरी कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल एवं पांडिचेरी कर्नाटक में कावेरी नदी पर स्थित शिवसमुद्रम में 1902 में भारत का दूसरा जल विद्युत् उत्पादन संयन्त्र लगाया गया था |
नागार्जुन सागर कृष्णा तेलन्गाना एवं आंध्रप्रदेश  
हीराकुण्ड महानदी ओड़िसा यह सम्बलपुर से 15 किमी. दूर, लगभग 61 मी. ( 200 फीट ) ऊँचा एवं 4801 मी. ( मुख्य बांध की लम्बाई ) लम्बा विश्व का सबसे लम्बा बांध है | इसकी कुल लम्बाई 25.8 किमी. है |
चम्बल नदी घाटी चम्बल मध्य प्रदेश एवं राजस्थान इस परियोजना के अंतर्गत 3 बांध – गाँधी सागर बांध ( मध्य प्रदेश ), राणा प्रताप सागर बांध एवं जवाहर सागर बांध ( राजस्थान ) निर्मित किये गये है |
टिहरी बांध भागीरथी उत्तराखंड इसका निर्माण भागीरथी नदी पर भागीरथी और भिलांगना नदी के संगम से थोड़ा आगे उत्तराखंड के टिहरी जिले में किया गया है |
मयूराक्षी मयूराक्षी पश्चिम बंगाल  
फरक्का गंगा पश्चिम बंगाल  
काकरापार ताप्ती गुजरात  
उकाई ताप्ती गुजरात  
रिहंद रिहंद उत्तर प्रदेश  
इडुक्की पेरियार केरल  
माताटीला बेतवा मध्य प्रदेश  
जायकवाड़ी गोदावरी महाराष्ट्र  
नाथपा-झाकरी सतलुज हिमाचल प्रदेश  
मचकुंड मचकुंड आंध्रप्रदेश एवं ओड़िसा  
पोचम्पाद गोदावरी कर्नाटक  
तुलबुल झेलम जम्मु एवं कश्मीर  
दुलहस्ती चिनाब जम्मु एवं कश्मीर  
कोयना कोयना महाराष्ट्र  
सलाल चिनाब जम्मु एवं कश्मीर  
टनकपुर महाकाली नदी भारत-नेपाल सीमा ( उत्तर प्रदेश )  
साबरमती साबरमती गुजरात  
शारदा शारदा उत्तर प्रदेश  
बाण सागर सोन मध्य प्रदेश  
मैटूर कावेरी तमिलनाडु  
सबरिगिरी पम्बा-काकी केरल  
श्री सैलम कृष्णा कर्नाटक  
चुखा / चुक्का वांग्चु / रायडक भूटान एवं भारत 1974 में इसका निर्माण कार्य भारत सरकार की पूर्ण वित्तपोषित इकाई के रूप में प्रारंभ किया गया था, जिसमें 60% अनुदान और 40% ऋण के रूप में था| ऋण को 5% बार्षिक की दर पर 15 वर्षों में अदा करना था| इस परियोजना को भूटानी प्रबंधन के हाथों में 1991 में सौंप दिया गया|
काल्पोंग काल्पोंग अंडमान एवं निकोबार  
घाट प्रभा घाट प्रभा कर्नाटक  
बगलिहार चिनाब जम्मु एवं कश्मीर  
रानी लक्ष्मीबाई बांध बेतवा मध्य प्रदेश  
सिद्रापोंग   पश्चिम बंगाल सिद्रापोंग जल विद्युत् परियोजना ( Sidrapong Hydroelectric Power Project ) भारत का प्रथम जल विद्युत् संयंत्र है| इसकी स्थापना 1897 में दार्जिलिंग के निकट सिद्रापोंग में हुई थी|

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