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सोडियम धातु के गुण, उपयोग और यौगिक

sugamgyan

Mar 19, 2019

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सोडियम धातु के गुण, उपयोग और यौगिक – यह चाँदी के समान सफेद और मुलायम धातु होती है। इसे चाकू से भी आसानी से काटा जा सकता है। इसका आपेक्षिक घनत्व 0.97 होता है। पानी से हल्का होने के कारण यह पानी पर तैर सकता है। यह विद्युत का सुचालक है और बेंजीन तथा ईथर में विलेय है। सोडियम बहुत ही अभिक्रियाशील धातु है। यह मुक्त अवस्था मे नही पाया जाता। परंतु संयुक्त अवस्था मे पर्याप्त मात्रा में क्लोराइड, नाइट्रेट, कार्बोनेट, बोरेट और सल्फेट के रूप में पाया जाता है। इसका निष्कर्षण कास्टनर विधि द्वारा द्रवित सोडियम हाइड्रोक्साइड के वैद्युत अपघटन से होता है। इसके अतिरिक्त डाउन विधि द्वारा भी इसका निष्कर्षण होता है।

सोडियम के रासायनिक गुण –

साधारण ताप पर शुष्क हवा और ऑक्सीजन का इस पर कोई असर नही पड़ता। परन्तु आर्द्र हवा में इस पर सोडियम ऑक्साइड की परत जम जाती है जो जल वाष्प के साथ मिलकर सोडियम हाइड्रॉक्साइड का निर्माण करती है। फिर यह सोडियम हाइड्रॉक्साइड वायु में उपस्थित कार्बन डाईऑक्साइड के साथ मिलकर सोडियम कार्बोनेट बनाती है। इसी वजह से सोडयम धातु को केरोसीन में डुबो कर रखा जाता है। यह जल के साथ तीव्रता से प्रक्रिया कर हाइड्रोजन गैस और सोडियम हाइड्रॉक्साइड का निर्माण  करती है। यह क्लोरीन की उपस्थिति में जलाये जाने पर सोडियम क्लोराइड का निर्माण करती है। जब इसे कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थित में जलाया जाता है तो यह सोडियम कार्बोनेट का निर्माण करती है। यह अमोनिया के साथ प्रक्रिया करके सोडामाइड का निर्माण करती है। जब यह एल्कोहल के साथ क्रिया करती है हाइड्रोजन गैस मुक्त होती है और सोडियम एल्काक्साइड का निर्माण होता है। यह अम्लों के साथ क्रिया कर लवण बनाती है और इसमें हाइड्रोजन गैस विमुक्त होती है।

सोडियम धातु के उपयोग –

इसका उपयोग अवकारक के रूप में व सांश्लेषिक प्रतिक्रियाओं में किया जाता है। सोडियम लेड मिश्रधातु का उपयोग टेट्राइथाइल लेड नामक अफस्फोटनरोधी यौगिक बनाने में होता है। इसके अतिरिक्त द्रवित सोडियम का उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों में शीतलन उत्पन्न करने में भी किया जाता है।

सोडियम धातु के यौगिक

सोडियम हाइड्रॉक्साइड  (Sodium Hydroxide) –

सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) को दाहक सोडा अथवा कास्टिक सोडा के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रयोग सोडियम धातु के निर्माण में, पेट्रोलियम को शुद्ध करने, कृत्रिम रेशे के निर्माण में, साबुन बनाने में, रेयॉन तथा रंग बनाने में, सूती कपड़ों में चमक पैदा करने में, प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में किया जाता है।

सोडियम कार्बोनेट (Sodium Carbonate) –

सोडियम कार्बोनेट को धोने का सोडा या धावन सोडा या वाशिंग सोडा के नाम से भी जाना जाता है। बड़े पैमाने पर वाशिंग सोडा का निर्माण लेब्लैंक विधि, सॉल्वे विधि (अमोनिया – सोडा विधि ) तथा वैद्युत विधि के माध्यम से किया जाता है। इसका उपयोग जल का खारापन दूर करने, शीशा, कास्टिक सोडा, कागज, साबुन आदि के निर्माण में व प्रयोगशाला में प्रतिकारक के रूप में किया जाता है। वाशिंग सोडा का जलीय विलयन क्षारीय होता है। इसमें अपमार्जक का गुण होता है।

सोडियम बाइकार्बोनेट (Sodium Bicarbonate) –

सोडियम बाइकार्बोनेट को बेकिंग सोडा या खाने का सोडा के नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग औषधि के रूप में, पेट की अम्लीयता दूर करने, बेकिंग पाउडर बनाने और अग्निशामक यंत्रों में किया जाता है।

सोडियम क्लोराइड (Sodium Chloride) –

सोडियम क्लोराइड को साधारणतः नमक के रूप में जाना जाता है। यह मानव के भोजन का अभिन्न अंग है। समुद्री जल के वाष्पीकरण प्रक्रिया द्वारा समुद्री नमक की प्राप्ति होती है। इसे बर्फ के साथ मिलाकर हिम मिश्रण बनाया जाता है। समुद्री जल में घुले कुल ठोस पदार्थ का 75 % सोडियम क्लोराइड है। डीहाइड्रेशन के समय शरीर में इसी यौगिक की कमी हो जाती है। नमक में मैग्नीशियम क्लोराइड की उपस्थित के कारण यह हवा में रख देने से नमी सोख लेता है।

सोडियम पराक्साइड (Sodium Peroxide) –

यह हल्के पीले रंग का चूर्ण होता है। खुली हवा में छोड़ देने से यह जम जाने के कारण सफ़ेद हो जाता है। इसका उपयोग हाइड्रोजन पराक्साइड के निर्माण में, रंगाई में, प्रयोगशाला में ऑक्सीकारक के रूप में, रेशम के विरंजन के रूप में होता है। इसका उपयोग जहाजों, पनडुब्बियों और अस्पतालों की बंद हवा को शुद्ध करने में किया जाता है।

ग्लोबर साल्ट –

सोडियम सल्फेट को ही ग्लोबर साल्ट के नाम से जाना जाता है। यह रंगहीन व रवेदार ठोस पदार्थ होता है। इसे सोडियम हाइड्राक्साइड या सोडियम कार्बोनेट पर सल्फ्यूरिक अम्ल की क्रिया द्वारा निर्मित किया जाता है। इसके एक अणु में जल के 10 अणु अवस्थित होते हैं। इसका उपयोग शीशा, कागज, दवा, और सोडियम सल्फाइड के निर्माण में किया जाता है।

सोडियम नाइट्रेट (Sodium Nitrate) –

सोडियम नाइट्रेट चिली व पेरु में काफी मात्रा में पाया जाता है। इसे चिली साल्टपीटर के नाम से जाना जाता है। इसका उपयोग खाद बनाने में और नाइट्रिक अम्ल के निर्माण में किया जाता है।

सोडियम थायोसल्फेट (Sodium Thiosulphate) –

सोडियम थायोसल्फेट को हाइपो के नाम से भी जाना जाता है। इसका प्रयोग फोटोग्राफी में नेगेटिव और पॉजिटिव के स्थायीकरण में किया जाता है। यह अनपघटित सिल्वर ब्रोमाइट को दूर कर देता है। इसका उपयोग सिल्वर और गोल्ड के निष्कर्षण में भी किया जाता है।

बोरेक्स या सुहागा (Borex) –

सोडियम टेट्राबोरेट देका हाइड्रेट को बोरेक्स या सुहागा के नाम से जाना जाता है। यह सफेद क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ होता है। यह जल में विलेय होता है। इसका उपयोग काँच, साबुन व मोमबत्ती उद्योग में, जल को मृदु करने में और चमड़ा उद्योग में किया जाता है।

माइक्रोकॉस्मिक लवण –

सोडियम अमोनियम हाइड्रोजन फॉस्फेट को ही माइक्रोकॉस्मिक लवण के नाम से जाना जाता है।

केल्गन (Calgen) –

सोडियम हेक्सा मेटाफ़ॉस्फ़ेट को ही केल्गन के नाम से जाना जाता है। इसका उपयोग जल की कठोरता दूर करने के लिए किया जाता है।

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